Samachar Post डेस्क,बिहार :बिहार में लागू शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने कानून की समीक्षा की मांग उठाई है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मंशा शराबबंदी समाप्त करने की नहीं, बल्कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने की है। पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान चिराग पासवान ने कहा कि किसी भी कानून या योजना की समय-समय पर समीक्षा आवश्यक होती है, ताकि यह आंका जा सके कि वह अपने मूल उद्देश्य को कितना पूरा कर पा रही है। उन्होंने कहा, समीक्षा का अर्थ यह नहीं है कि हम शराबबंदी हटाने की बात कर रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि कानून जिस मकसद से बनाया गया था, वह जमीन पर कितना सफल हुआ है, इसकी ईमानदारी से जांच हो।
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नकली शराब और अवैध आपूर्ति पर चिंता
चिराग पासवान ने राज्य में जहरीली शराब से होने वाली मौतों और अवैध शराब की आपूर्ति के मामलों पर गंभीर चिंता जताई। उनका कहना था कि यदि प्रतिबंध के बावजूद ऐसी घटनाएं हो रही हैं, तो यह कानून के क्रियान्वयन में कमियों की ओर संकेत करता है। उन्होंने प्रवर्तन तंत्र की व्यापक समीक्षा कर खामियों को दूर करने पर जोर दिया, ताकि कानून का उद्देश्य सही मायनों में पूरा हो सके। चिराग पासवान ने याद दिलाया कि जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में शराबबंदी लागू की गई थी, तब उनकी पार्टी विपक्ष में रहते हुए भी इसका समर्थन कर चुकी है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी शराब की लत के खिलाफ है और समाज पर इसके दुष्प्रभावों को समझती है।
अन्य दलों की प्रतिक्रिया
बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भी कुछ सदस्यों ने शराबबंदी नीति की समीक्षा की मांग उठाई थी। हालांकि जनता दल (यूनाइटेड) ने कानून पर पुनर्विचार से इनकार किया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में शराबबंदी के क्रियान्वयन और प्रभाव को लेकर बहस और तेज हो सकती है।
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