Samachar Post रिपोर्टर,रांची :झारखंड में नगर निकाय चुनाव संपन्न होने के बाद अब प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। 48 नगर निकायों में चुनाव और नए जनप्रतिनिधियों के पदभार संभालते ही कई कार्यपालक पदाधिकारी अपने पद से हटने या नई जगह पोस्टिंग की जुगाड़ में जुट गए हैं। 23 फरवरी को मतदान और फरवरी के अंत तक मतगणना पूरी होने के बाद, 19 मार्च तक सभी नव निर्वाचित मेयर, चेयरमैन और वार्ड पार्षदों ने शपथ लेकर कार्यभार संभाल लिया।इसके बाद अब निकायों में सत्ता का संतुलन बदल गया है, जिससे कार्यपालक पदाधिकारियों की भूमिका भी सीमित होने लगी है।
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क्यों बढ़ी बेचैनी?
दरअसल, 2020 और 2023 में कई नगर निकायों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक जिम्मेदारी कार्यपालक पदाधिकारियों को सौंप दी गई थी। झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 के तहत इन अधिकारियों ने लंबे समय तक निकायों में योजनाओं से लेकर भुगतान तक की पूरी कमान संभाली। अब नए जनप्रतिनिधियों के आने के बाद वही अधिकार और फैसले उनके हाथ में जाने लगे हैं, जिससे टकराव की स्थिति बन रही है। सूत्रों के मुताबिक, कई अधिकारी अब नए मेयर या अध्यक्ष के साथ तालमेल बैठाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि कुछ दूसरे स्थान पर ट्रांसफर के लिए पैरवी में जुट गए हैं।
वर्षों से जमे थे कई अधिकारी
कई कार्यपालक पदाधिकारी पिछले 3 से 5 साल से एक ही निकाय में तैनात हैं। चुनाव नहीं होने के कारण वे लंबे समय तक प्रभावी भूमिका में रहे, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि निकाय चुनाव में हुए भारी खर्च और नए नेतृत्व के आने के बाद निकायों में टकराव और पारदर्शिता के मुद्दे उभर सकते हैं।
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