Samachar Post रिपोर्टर, रांची : जिले के पलाश सभागार में सिद्धको फेड की ओर से लघु वनोत्पादों के संग्रहण और मूल्य संवर्धन पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्घाटन राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वनोपज को बेहतर बाजार से जोड़कर किसानों और वन आश्रित परिवारों की आय बढ़ाना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
तीन अहम समझौते, किसानों को मिलेगा लाभ
कार्यक्रम के दौरान तीन महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। सिद्धको फेड और ICAR-NISA के बीच ब्रूड बैंक समझौता, जिससे गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। झासको लैंप, लखीश्वरी लाह उद्योग और वाइल्ड हार्वेस्ट वेंचर प्राइवेट लिमिटेड के साथ भी समझौते हुए। इन समझौतों से किसानों को वनोपज बेचने, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग में सीधे जुड़े रहने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि की संभावना बढ़ेगी।
यह भी पढ़ें: चंपाई सोरेन के आवास पहुंचे सुदेश महतो, स्व. वीर सोरेन को दी श्रद्धांजलि
“बाजार की मांग समझें किसान”: मंत्री
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि अब समय बदल चुका है। “अगर बाजार में किस चीज की मांग है, उसी अनुसार उत्पादन करना होगा, तभी उचित मूल्य मिलेगा। सरकार हर स्तर पर किसानों के साथ खड़ी है चाहे प्रशिक्षण हो, प्रोसेसिंग यूनिट हो या मार्केट लिंकिंग।”
झारखंड की ताकत है वन क्षेत्र
मंत्री ने बताया कि झारखंड की लगभग 29% भूमि वन क्षेत्र से ढकी हुई है। उन्होंने कहा, राज्य की बड़ी आबादी वनोपज पर निर्भर है। अगर सही योजना बनाई जाए तो वनोपज बड़े पैमाने पर रोजगार का साधन बन सकती है।
उत्पादन के आंकड़ों से बढ़ा उत्साह
कार्यक्रम में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, सालाना लगभग 4 लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन, प्रतिदिन लगभग 3 लाख लीटर दूध का उत्पादन, मडुआ की खेती पहले 20 हजार हेक्टेयर में थी, अब 1 लाख हेक्टेयर तक बढ़ गई, करंज की खरीद 47 रुपये प्रति किलो की दर से इन आंकड़ों ने किसानों और उपस्थित अधिकारियों में उत्साह बढ़ाया और वनोपज के सही उपयोग और बाजार से जुड़ाव की संभावनाओं को उजागर किया।
Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।