Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड के जामताड़ा स्थित महिला कॉलेज जामताड़ा में यूजी सेमेस्टर-2 की परीक्षा को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। छात्राओं का आरोप है कि पॉलिटिकल साइंस (एमडीसी ग्रुप-सी) की परीक्षा निर्धारित तिथि 17 फरवरी के बजाय एक दिन पहले ही आयोजित कर दी गई, जिसके कारण करीब 50 छात्राएं परीक्षा देने से वंचित रह गईं। छात्राओं के अनुसार, तय तारीख पर जब वे कॉलेज पहुंचीं तो उन्हें यह कहकर प्रवेश नहीं दिया गया कि परीक्षा पहले ही संपन्न हो चुकी है। इस मामले को लेकर छात्राओं ने उपायुक्त कार्यालय जामताड़ा को आवेदन सौंपकर पुनः परीक्षा कराने की मांग की है।
छात्राओं का पक्ष
परीक्षा देने पहुंची छात्रा प्रतिभा कुमारी ने कहा कि रूटीन के अनुसार परीक्षा 17 फरवरी को थी, लेकिन कॉलेज ने एक दिन पहले ही एमडीसी ग्रुप की परीक्षा ले ली। वहीं, छात्रा कल्याणी कुमारी ने भी आरोप लगाया कि परीक्षा तिथि को लेकर स्पष्ट सूचना नहीं दी गई, जिससे छात्राएं भ्रमित हो गईं और परीक्षा से वंचित रह गईं। छात्राओं का कहना है कि कॉलेज प्रशासन की ओर से समय रहते सही जानकारी नहीं दी गई। इसी वजह से वे परीक्षा नहीं दे सकीं और अब उन्हें शैक्षणिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है।
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कॉलेज प्रशासन का जवाब
दूसरी ओर, कॉलेज प्रशासन ने छात्राओं के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। प्रोफेसर रत्नेश कुमार झा ने स्पष्ट किया कि परीक्षा विश्वविद्यालय के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही ली गई है। उनके अनुसार, एमडीसी फ्लो-वाइज ग्रुप सिस्टम के तहत अलग-अलग विषयों की परीक्षा अलग-अलग तिथियों में होती है। एमडीसी जियोलॉजी और बॉटनी की परीक्षा पहले ही संपन्न हो चुकी थी और छात्राएं अपने ऑनर्स ग्रुप को देखकर परीक्षा देने पहुंचीं, जिससे भ्रम की स्थिति बनी। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय स्तर की परीक्षा है और कॉलेज ने विश्वविद्यालय के निर्देशों का ही पालन किया है।
अब आगे क्या?
फिलहाल एक ओर छात्राएं पुनः परीक्षा की मांग पर अड़ी हैं, वहीं कॉलेज प्रशासन अपने फैसले को सही ठहरा रहा है। अब पूरे मामले पर जिला प्रशासन के निर्णय का इंतजार है कि इस विवाद का समाधान किस तरह निकाला जाता है।
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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।