Samachar Post रिपोर्टर,साहिबगंज :करीब 1250 करोड़ रुपये के कथित अवैध पत्थर खनन और परिवहन मामले में जांच तेज हो गई है। मामले की जांच कर रही CBI अब सिर्फ पत्थर माफिया ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी गहन पड़ताल कर रही है। एजेंसी दस्तावेजों और सबूतों को जुटाकर जल्द ही अदालत में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है।
दस्तावेज और बयानों को जोड़कर बना रही केस, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बढ़ी रफ्तार
जांच एजेंसी पूर्व में की गई छापेमारियों में जब्त दस्तावेजों और आरोपितों के बयानों का विश्लेषण कर रही है। मकसद है कि अदालत में मजबूत केस पेश किया जा सके। जांच में ED की पहले की कार्रवाई से भी एजेंसी को दिशा मिल रही है, क्योंकि मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की पड़ताल पहले ही की जा चुकी है। दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने साहिबगंज जिले के नींबू पहाड़ क्षेत्र से जुड़े मामले में CBI को स्वतंत्र रूप से जांच करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए एजेंसी को गंभीरता से जांच करने को कहा। इसके बाद से CBI टीम लगातार क्षेत्र में सक्रिय है और कैंप कर जांच आगे बढ़ा रही है।
छापेमारी में नकद और सोना बरामद
पिछले दो वर्षों में की गई छापेमारियों के दौरान लगभग 60 लाख रुपये नकद, करीब एक किलो सोना, 1.2 किलो सोना-चांदी के आभूषण, 61 कारतूस, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और शेल कंपनियों में निवेश से संबंधित कागजात जब्त किए गए थे। नवंबर 2023 में हाईकोर्ट के निर्देश पर प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से जांच जारी है। मामले के अहम गवाह विजय हांसदा के बयान से मुकरने के बाद प्रकरण हाईकोर्ट तक पहुंचा था। इसके बाद अदालत ने पूरी जांच CBI को सौंप दी, जिससे जांच का दायरा और व्यापक हो गया।
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खनन क्षेत्रों का निरीक्षण और पूछताछ
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जनवरी 2026 में CBI टीम ने नींबू पहाड़ सहित कई इलाकों का दौरा किया। अधिकारियों और स्थानीय लोगों से पूछताछ की गई। जिला खनन कार्यालय में भी जांच की गई, जबकि मिर्जा चौकी और कोटालपोखर क्षेत्रों में पड़ताल हुई। ED द्वारा जब्त जहाज का निरीक्षण भी किया गया और सकरीगली क्षेत्र से जुड़े मामलों में जानकारी जुटाई गई।
अफसरों की भूमिका पर नजर
सूत्रों के अनुसार अब जांच का फोकस इस बात पर है कि इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन प्रशासनिक मिलीभगत के बिना संभव था या नहीं। इसी आधार पर कई अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है। कुल मिलाकर साहिबगंज का यह मामला अब अहम मोड़ पर पहुंच चुका है और चार्जशीट दाखिल होने के बाद कई बड़े नाम कानूनी घेरे में आ सकते हैं।
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