Samachar Post रिपोर्टर, रांची :नए साल की शुरुआत 1 जनवरी को जहां देशभर में जश्न के साथ हुई, वहीं रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर कई सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों ने अंग्रेजी कैलेंडर और पश्चिमी नववर्ष के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने अंग्रेजी नववर्ष के उत्सव का बहिष्कार करते हुए लोगों से भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाने की अपील की। संगठनों ने कहा कि सरकार अंग्रेजी कैलेंडर को आधिकारिक धार्मिक मान्यता नहीं देती, लेकिन शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक जीवन में इसका अत्यधिक उपयोग हो रहा है। 1 जनवरी का नववर्ष भारतीय संस्कृति का पारंपरिक हिस्सा नहीं, फिर भी इसे बड़े पैमाने पर मनाया जाता है, जिससे सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकता और पारंपरिक मूल्य प्रभावित हो रहे हैं। पश्चिमी नववर्ष के बढ़ते प्रभाव से भारतीय धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक तिथियों की स्वीकार्यता कम हो रही है।
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क्या हैं मांगें?
प्रदर्शन कर रहे संगठनों ने सरकार से आग्रह किया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को भारतीय नववर्ष के रूप में आधिकारिक मान्यता दी जाए। विक्रम संवत कैलेंडर को शिक्षा, प्रशासन और सामाजिक जीवन में शामिल किया जाए। भारतीय ज्ञान और सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करने के लिए इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जाए। विरोध मार्च में राष्ट्रीय हिंदू संगठन के अध्यक्ष ब्रजेश सिंह, चंद्र किशोर साहू, राजू सिंह, विकास सिंह समेत कई प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन के सदस्य उपस्थित रहे। सुरक्षा और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए प्रशासन सतर्क रहा।
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