Samachar Post डेस्क, रांची :ईरान की अर्थव्यवस्था संकट में है। रियाल ऐतिहासिक रूप से कमजोर हो गया है और जनता सड़कों पर उतर आई है। वही राष्ट्रवाद, जो 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद देश में जनता के बीच ताकत बनकर उभरा था, अब अपना असर खो चुका है। तेहरान से लेकर पूरे देश में बाजार बंद हैं और दुकानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। रोटी और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से लोगों का गुस्सा सरकार पर फूट पड़ा है। जनता अब सीधे सरकार से सवाल कर रही है हमारे रुपये इतने कमजोर क्यों हैं? और सार्वजनिक संपत्ति निजी हाथों में क्यों चली गई?
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अमेरिकी प्रतिबंध अकेले जिम्मेदार नहीं
ईरान पर लंबे समय से अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंध हैं, लेकिन मौजूदा संकट की सबसे बड़ी वजह सत्ता का केंद्रीकरण, भ्रष्टाचार और सार्वजनिक संपत्ति का निजीकरण भी है। इन नीतियों ने गरीबों को और गरीब और अमीरों को और अमीर बना दिया। नतीजा जनता अब सड़कों पर है।
दुनिया के लिए सबक
श्रीलंका, नेपाल, बंग्लादेश और फ्रांस में हाल के वर्षों में जो विरोध-प्रदर्शन हुए, वहीं अब ईरान में भी वही कहानी है। जब भूख, गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई चरम पर होती है, तो सरकारी प्रचार और राष्ट्रवाद का असर कम हो जाता है, और जनता अपने हालात के लिए सीधे सवाल उठाती है।
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