Samachar Post डेस्क, रांची : उत्तर प्रदेश के बहराइच में हुए सांप्रदायिक दंगे से जुड़े एक मामले में अदालत का फैसला सजा से ज्यादा उसके तर्क को लेकर चर्चा में है। सेशन कोर्ट ने मुख्य अभियुक्त सरफ़राज़ को मौत की सजा सुनाई, लेकिन फैसले में मनु स्मृति के हवाले ने कानूनी और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला 13 अक्टूबर 2024 का है। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान महसी तहसील के महराजगंज इलाके में हिंसा भड़क गई थी। अभियोजन के अनुसार, राम गोपाल मिश्रा एक मकान की छत पर झंडा बदलने की कोशिश कर रहे थे, इसी दौरान विवाद बढ़ा और उन्हें गोली मार दी गई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और हालात कर्फ्यू जैसे बन गए थे।
यह भी पढ़ें: सीएम हेमंत सोरेन से आम लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने की मुलाकात
अदालत का फैसला
11 दिसंबर 2025 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (प्रथम) पवन कुमार शर्मा ने सरफ़राज़ को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया। साथ ही, इस मामले में नौ अन्य अभियुक्तों को उम्रकैद, जबकि तीन को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। उत्तर प्रदेश के बहराइच में हुए सांप्रदायिक दंगे से जुड़े एक मामले में अदालत का फैसला सजा से ज्यादा उसके तर्क को लेकर चर्चा में है। सेशन कोर्ट ने मुख्य अभियुक्त सरफ़राज़ को मौत की सजा सुनाई, लेकिन फैसले में मनु स्मृति के हवाले ने कानूनी और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला 13 अक्टूबर 2024 का है। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान महसी तहसील के महराजगंज इलाके में हिंसा भड़क गई थी। अभियोजन के अनुसार, राम गोपाल मिश्रा एक मकान की छत पर झंडा बदलने की कोशिश कर रहे थे, इसी दौरान विवाद बढ़ा और उन्हें गोली मार दी गई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल
अभियोजन का पक्ष
अभियोजन ने अदालत को बताया कि हत्या बेहद क्रूर और नृशंस तरीके से की गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में 29 एंट्री वुंड और 2 एग्जिट वुंड पाए गए। अभियोजन के अनुसार, यह ठंडे दिमाग से की गई लक्षित हत्या थी, जिसका उद्देश्य समाज में भय पैदा करना था। फोरेंसिक जांच में हथियार और गोलियों का मिलान भी अभियुक्त से जोड़ा गया।
फैसले का विवादित हिस्सा
फैसले के पेज नंबर 135 पर न्यायाधीश ने दंड के औचित्य को स्पष्ट करते हुए मनु स्मृति के श्लोक का उल्लेख किया। आदेश में कहा गया कि सजा ऐसी होनी चाहिए, जिससे अपराधियों में भय उत्पन्न हो और समाज में न्याय व्यवस्था पर भरोसा बना रहे। इसी संदर्भ में मनु स्मृति का हवाला दिया गया, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।
राजनीतिक और कानूनी प्रतिक्रियाएं
मनु स्मृति के उल्लेख को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कुछ नेताओं ने इसे न्यायाधीश का विवेकाधिकार बताया। विपक्षी दलों ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और अनुचित करार दिया। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि दंगों के मामलों में आमतौर पर अदालतें सामूहिक हिंसा और परिस्थितियों को ध्यान में रखती हैं, लेकिन इस केस में अदालत ने स्पष्ट मंशा और लक्षित हत्या मानते हुए कठोरतम सजा दी है।
आगे क्या होगा
फैसले के बाद मृतक की पत्नी रोली मिश्रा ने संतोष जताया है, जबकि अभियुक्त पक्ष ने इसे ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है। अब इस मामले का अंतिम निर्णय हाईकोर्ट और संभवतः सुप्रीम कोर्ट में होना तय माना जा रहा है।
Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।