Samachar Post रिपोर्टर, रांची :झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में एसीबी (ACB) की जांच अब नए और चौंकाने वाले खुलासे कर रही है। जांच रिपोर्ट से पता चला है कि प्रिंट रेट से अधिक कीमत पर शराब बेचने के लिए एक बड़ा सिंडिकेट सक्रिय था, जिसमें विभागीय अधिकारी, सप्लाई कंपनियां और ठेकेदार शामिल थे।
जांच में सामने आई साजिश की परतें
एसीबी के अनुसार, जो अधिकारी इस सिंडिकेट की बात नहीं मानते थे, उनका ट्रांसफर तुरंत करवा दिया जाता था। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि अधिकारियों के तबादले के लिए “मैन पावर सप्लाई” देने वाली विजन कंपनी का प्रतिनिधि पुनीत अग्रवाल उत्पाद सचिव से सीधा संपर्क रखता था।
45 लाख की डील और पुंदाग आवास पर कैश डिलीवरी
एक अधिकारी ने कोर्ट में दिए बयान में कबूल किया कि तत्कालीन उत्पाद सचिव को विजन कंपनी के प्रतिनिधि ने 45 लाख रुपये की रिश्वत दी। इसके अलावा, 2024 के जुलाई और अगस्त महीने में कुल सवा करोड़ रुपये से अधिक कैश सचिव के पुंदाग स्थित सरकारी आवास पर पहुंचाया गया। यह रकम प्रिंट रेट से ज्यादा कीमत पर शराब बेचने से मिले कमीशन की थी।
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कोर्ट में दर्ज हुआ बयान
एसीबी को दिए 164 CrPC के बयान में एक अधिकारी नीरज कुमार ने बताया कि सचिव ने एक बिल के भुगतान के लिए मैन पावर कंपनी से 50 लाख रुपये भी लिए थे। उनका बयान पांच पन्नों का है और कोर्ट में दर्ज किया गया है।
कमीशन का फिक्स बंटवारा इस तरह होता था
45% हिस्सा: विजन और अन्य मैन पावर सप्लाई कंपनियों का
55% हिस्सा: तत्कालीन उत्पाद सचिव, उत्पाद आयुक्त और जिला उत्पाद अधीक्षक का
फर्जी बैंक गारंटी और ट्रांसफर का खेल
जांच में यह भी सामने आया कि विजन कंपनी की बैंक गारंटी फर्जी थी, और जिन अधिकारियों ने इसका विरोध किया, उन्हें हटाकर दूसरे जिलों में भेज दिया गया। एसीबी अब इस घोटाले से जुड़े सभी वित्तीय लेनदेन और बैंक खातों की जांच कर रही है।
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