Samachar Post रिपोर्टर, नई दिल्ली/रांची: जीएसटी में कटौती के बाद आम लोगों को सस्ते दामों की उम्मीद थी, लेकिन FMCG कंपनियों ने चालाकी से स्थिति बदल दी है। सरसों तेल और रिफाइंड तेल पर GST तो कम हुआ, लेकिन कंपनियों ने पैक का वजन घटा दिया। पहले जहां एक लीटर की जगह 910 ग्राम तेल मिलता था, अब कई ब्रांड 750, 800, 805, 815 और 820 ग्राम के पैक बेच रहे हैं। यानी पैकिंग वही, दाम लगभग वही, लेकिन तेल कम।
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केवल तेल ही नहीं, अन्य चीज़ों के दाम भी बढ़ाए गए
ब्रांडेड साबुन 38 रुपये → 39 रुपये, सर्फ वॉश पाउडर 1 किलो 74 → 76 रुपये, 500 ग्राम 38 → 39 रुपये, दूसरी कंपनी ने वॉश पाउडर 132 → 134 रुपये, 500 ग्राम 66 → 67 तक बढ़ गई है। रुपयेबिस्किट कंपनियां भी ग्राहकों को उलझा रही हैं। एक 4.5 रुपये का पैक, दुकानदार दो पीस 9 रुपये में देना चाहते हैं, जबकि ग्राहक एक ही पैक लेना चाहते हैं।
खुदरा व्यापारियों की प्रतिक्रिया
जेसीपीडीए अध्यक्ष संजय अखौरी ने कहा सरकार को इस पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। जिन चीज़ों पर जीएसटी में राहत मिली है, वहां वजन घटाना और जिन पर नहीं मिली वहां दाम बढ़ाना, जनता के साथ धोखा है। तेल के पैक का वजन मानक होना चाहिए। उन्होंने बताया कि रसोई से लेकर वॉशिंग पाउडर तक सब कुछ धीरे-धीरे महंगा होता जा रहा है। लोग सोचते हैं कि चीज़ें महंगी नहीं हुईं, लेकिन वास्तव में उन्हें कम मात्रा में सामान मिल रहा है, जिससे घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है।
मिडिल क्लास और लोअर इनकम परिवारों पर असर
धीरे-धीरे हर महीने कुछ सौ रुपये का अतिरिक्त खर्च बढ़ रहा है, जिससे दूध, सब्ज़ी और बच्चों के स्कूल खर्च पर कटौती करनी पड़ रही है। संजय अखौरी ने चेतावनी दी कि कंपनियों की यह चालाकी जनता की खरीदने की शक्ति घटा रही है, और रोजमर्रा की जिंदगी महंगी होती जा रही है।
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