Samachar Post रिपोर्टर, रांची : गुमला और रांची के सीमा क्षेत्र में बेड़ो और भरनो के बीच एक अनोखा प्राकृतिक दृश्य देखने को मिल रहा है। यहां तीन अलग-अलग पेड़, पीपल, बरगद और बाकर, इतने घुल-मिल गए हैं कि दूर से देखने पर यह एक ही विशाल पेड़ जैसा प्रतीत होता है।
तीन पेड़ों का संगम: प्राकृतिक चमत्कार
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पेड़ करीब 30 साल पहले एक शिक्षक द्वारा लगाया गया था। पीपल, बरगद और बाकर के पत्ते इस तरह जुड़ गए हैं कि यह एक अद्भुत प्राकृतिक संगम के रूप में दिखाई देता है। न केवल पर्यटकों, बल्कि आसपास के ग्रामीण भी इस पेड़ को देखने आते हैं और इसे एक दिव्य चमत्कार मानते हैं।
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सामाजिक संदेश: विविधता में एकता
यह पेड़ केवल प्राकृतिक अद्भुतता ही नहीं है, बल्कि समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश भी देता है। यह दर्शाता है कि अलग-अलग जाति, धर्म और समुदाय के लोग मिलकर रह सकते हैं। विविधता में एकता का यह संदेश स्थानीय लोगों के लिए प्रेरणादायक साबित हो रहा है।
आस्था और पर्यटक आकर्षण
इस पेड़ के आसपास लोगों की आस्था भी गहरी है। कुछ लोग इसे पूजा का स्थान मानते हैं और स्थानीय त्योहारों या अवसरों पर इसे नमन करते हैं। स्थानीय स्कूलों और सामाजिक संगठनों द्वारा भी इस प्राकृतिक चमत्कार को देखने के लिए छात्रों और पर्यटकों को नियमित रूप से लाया जाता है।
आधुनिक समाज के लिए चेतावनी
हालांकि यह दृश्य हमें एकता और समरसता का संदेश देता है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि आज का समाज इस संदेश को पूरी तरह से नहीं समझ पा रहा। सामाजिक दूरी, व्यक्तिगत तनाव और पारिवारिक दरारें बढ़ रही हैं। इस प्राकृतिक प्रतीक को देखकर अगर समाज कुछ सीखता है, तो यह विविधता में एकता, सम्मान और सद्भाव को बढ़ावा देने का अवसर बन सकता है।
गुमला-रांची सीमा का यह पेड़ सिर्फ पर्यावरण का सुंदर दृश्य नहीं, बल्कि मानव समाज के लिए एक चेतावनी और प्रेरणा का स्रोत भी है। यह याद दिलाता है कि समाज की मजबूती और खुशहाली केवल तभी संभव है जब लोग एक-दूसरे के प्रति सम्मान, समझ और प्यार का व्यवहार करें।
Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।