जिसे रजिस्ट्रार बनाया उसकी योग्यता जांच के लिए कमेटी बनाई, कमेटी में उसे भी सदस्य बना दिया जो खुद रजिस्ट्रार पद की दावेदार
ड्रग डायरेक्टर ने विभाग से कहा- रजिस्ट्रार पद के लिए मेरे नाम की भी अनुशंसा, जांच कमेटी से मुझे हटाया जाएविभाग का तर्क- जांच कमेटी में ड्रग डायरेक्टर के पद को नामित किया गया है, उस हैसियत से आप जांच करें
Samachar Post, रांची : तीन माह स्टेट फार्मेसी काउंसिल का पद खाली रहने के बाद बीते 30 जुलाई को स्वास्थ्य मंत्री की अनुशंसा पर राहुल कुमार को काउंसिल का रजिस्ट्रार सह सचिव नियुक्त किया गया। हालांकि, राहुल कुमार को रजिस्ट्रार बनाए जाने के बाद से ही विवाद शुरू हो गया। अन्य दावेदारों ने भास्कर से कहा कि राहुल कुमार न तो किसी सरकारी पद से जुड़ा है और न ही फार्मेसी के क्षेत्र में लंबा अनुभव है। ऐसे में राहुल कुमार की नियुक्ति नियमों को ताख पर रखते हुए की गई है। इधर, पद पर राहुल कुमार की अस्थाई नियुक्ति करते हुए चार सदस्यीय कमेटी भी बनाई गई जिन्हें जांच का जिम्मा दिया गया कि राहुल कुमार पद के लिए योग्य हैं या नहीं इसकी जांच करें। इस कमेटी में निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं को अध्यक्ष और ड्रग डायरेक्टर ऋतु सहाय समेत दो अन्य को सदस्य बनाया गया। विवाद यहां भी तब बढ़ गया जब रजिस्ट्रार पद की दावेदार ड्रग डायरेक्टर ऋतु सहाय को ही जांच कमेटी का सदस्य बना दिया गया। सवाल यह उठ रहा है कि जो खुद पद की दावेदार है वह कैसे मामले में निष्पक्ष जांच कर सकेंगी। 7 दिन के भीतर कमेटी को वर्तमान रजिस्ट्रार की योग्यता को लेकर हर बिंदुओं की समीक्षा के बाद जांच रिपोर्ट सौंपनी थी। लेकिन 10 दिन बाद भी जांच शुरू नही हो सकी है।
ड्रग डायरेक्टर ने जांच कमेटी से खुद को हटाने की मांग की, विभाग ने दिया गजब तर्क
इधर, विवादित मामले में योग्यता जांच के लिए बनी कमेटी से ड्रग डायरेक्टर ने खुद को हटाने की मांग विभाग से की। मिली जानकारी के अनुसार, उन्होंने पत्राचार कर विभाग से कहा कि पूर्व में रजिस्ट्रार के पद के लिए मेरे नाम की भी अनुशंसा विभाग ने की थी। ऐसे में मैं इस मामले में जांच नही कर सकती। मुझे कमेटी से हटाते हुए दूसरे को नामित किया जाए। इस पर विभाग ने तर्क देते हुए ऋतु सहाय से कहा कि कमेटी में जांच का जिम्मा निदेशक औषधि, राज्य औषधि नियंत्रण निदेशालय को सदस्य नामित किया गया है, इस पद के नाते आप जांच करें। विभाग ने ऋतु सहाय के बदले किसी अन्य को जांच कमेटी का सदस्य नामित करने को अस्वीकृत कर दिया।
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कहां हुई नियम की अनदेखी
- विभाग ने शुरूआत में जिन सात दावेदारों की अनुशंसा की थी, सभी सरकारी कर्मी थे। सभी के पास लंबे समय का कार्य अनुभव फार्मेसी के क्षेत्र से जुड़ा था। लेकिन इन नामों पर असंतोष जताते हुए विभागीय मंत्री ने इसमें अन्य के भी नाम शामिल कराएं।
- विभागीय पदाधिकारियों ने मंत्री के पास भेजे अनुशंसा में यह भी लिखा कि रजिस्ट्रार सह सचिव का पद रिस्पॉन्सिबल पद है। किसी सरकारी पदाधिकारी को कार्यभार सौंपा जाए तो कार्याें का निष्पादन सही ढ़ग से तथा जिम्मेदारी पूर्ण होगा। इसके लिए फार्मेसी के क्षेत्र से जुड़े किन्हीं सरकारी पदाधिकारी को निबंधक के पद की औपबंधिक रूप से जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसे भी विभागीय मंत्री ने नजरअंदाज किया।
विभाग ने अनुभव व पद के अनुसार इन नामों की अनुशंसा की थी
1. ऋतु सहाय – औषधि निदेशक, औषधि नियंत्रण निदेशालय।
2. सुमंत तिवारी – डिप्टी डायरेक्टर, औषधि नियंत्रण निदेशालय।
3. सुजीत कुमार – डिप्टी डायरेक्टर, औषधि नियंत्रण निदेशालय।
4. रजनीश सिंह – उप निदेशक, औषधि नियंत्रण निदेशालय।
5. डॉ. आशा रानी – प्रभारी प्रचार्या, राजकीय फार्मेसी कॉलेज, रांची।
6. विनीता प्रकाश – व्याख्याता, राजकीय फार्मेसी कॉलेज, रांची।
7. हरिहर नाथ – व्याख्याता, राजकीय फार्मेसी कॉलेज, रांची।
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कौन है राहुल कुमार, जिसे बनाया गया है फार्मेसी काउंसिल का रजिस्ट्रार?
राहुल कुमार के पास प्राइवेट फार्मेसी कॉलेज से की हुई फार्मेसी की डिग्री है। हालांकि जांच कमेटी को इसपर भी जांच करना है कि उक्त डिग्री सही है या नहीं। इसके अलावा राहुल कुमार पूर्व फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार सह सचिव कौशलेंद्र कुमार का रिश्तेदार है। सालों से राहुल कुमार बगैर किसी पद में रहते हुए अवैध रूप से कौशलेंद्र कुमार से साथ काउंसिल के कार्यों में जुड़ा था।
विधायक सरयू राय ने विधानसभा में भी उठाया था मुद्दा
विधायक सरयू राय ने भी इस मामले को विधानसभा में उठाया था। आरोप लगाया था कि गलत ढ़ग से नियमों को ताख पर रखते हुए फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार की नियुक्ति की गई है। स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा था कि बन्ना गुप्ता ने चुनावी फंड एकत्र करने के लिए राहुल कुमार की नियुक्ति की है। राहुल कुमार के बहनोई भी 18 साल तक इसी पद पर रह चुके हैं। कितनी राशि का भुगतान हुआ, कितनी शेष है, उसकी भी जानकारी उनको है।